डायबिटीज का आजीवन रहने वाली बीमारी है जब व्यक्ति के शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बन पाता है या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से काम नहीं कर पाती है|
आमतौर पर डायबिटीज तीन प्रकार के होते हैं|
इसमें आयुर्वेदिक औषधि द्वारा बिना किसी साइड इफेक्ट के लाभ मिल सकता है
थायराइड कोई रोग नहीं है बल्कि यह ग्रंथि का नाम है जिसकी वजह से यह रोग होता है । लेकिन आम भाषा में लोग इस समस्या को भी थायराइड ही कहते हैं | थायराइड एक तरह की ग्रंथि होती है जो गले में बिल्कुल सामने की ओर होती है | एक तितली की आकार की ग्रंथि है I यह ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रण करती है । भोजन को ऊर्जा में बदलने का काम करती है थायराइड को साइलेंट किलर भी कहते है |
अगर गर्भावस्था के दौरान मां को थायराइड समस्या है तो बच्चे को भी थायराइड की समस्या हो सकती है ।
तनाव , रजोनिवृत्ति , गर्भावस्था , ग्रेव्स रोग , आयोडीन की कमी , शराब और सिगरेट का सेवन , दवाओं का साइड इफेक्ट्स , हाशिमोटो रोग, ग्वाइटर रोग , सोया उत्पाद आदि ।
थायराइड के इलाज के लिए आयुर्वेद में कांचनार गुग्गुलु वृद्धिवाधिका वटी वरुणादि क्वाथ आदि चमत्कारी औषधियां उपलब्ध है।
लौकी का जूस , त्रिफला चूर्ण , अश्वगंधा क्वाथ |
जब व्यक्ति का वजन सामान्य वजन से अधिक हो जाता है या जरूरत से ज्यादा शरीर में फैट जमा हो जाता है उसे मोटापा कहते हैं ।
इसमें आयुर्वेद औषधि में पंचकर्म द्वारा बिना किसी साइड इफेक्ट के लाभ मिल सकता है ।
कोशिकाओं के असाधारण रूप से बढ़ने के विचार को कैंसर कहा जाता है इस रोग में कोशिकाएं अनियंत्रित और अव्यवस्थित रूप से बढ़ने लगती है जो शरीर के सामान्य विकास प्रणाली का हिस्सा नहीं होती है ।
देश में सबसे ज्यादा मुंह , ब्रेस्ट, सर्वाइकल फेफड़े और प्रोस्टेट कैंसर के मामले देखने को मिलते हैं जिसमें 60 परसेंट केस मुह ब्रेस्ट एवं गर्भाशय कैंसर के होते हैं वही किसी भी व्यक्ति के शरीर में कैंसर कई कारणों से होता है हालांकि कुछ कारण ऐसे हैं जो कैंसर होने की संभावना को बढ़ा सकते हैं धूम्रपान सिगरेट या बीड़ी पीने से मुंह गले फेफड़े पेट और मूत्राशय का कैंसर होने की संभावना होती है तंबाकू पान सुपारी पान मसाला और गुटखा खाने से मुंह जीव खाने की नली पेट गले गुर्दे और अग्नाशय का कैंसर होता है शराब पीने की वजह से श्वास नली भोजन नली और तालु में कैंसर होने की संभावना होती है धीमी आंच व धुंए में पके भोजन का सेवन करने से बड़ी आंतों का कैंसर होता है लगातार और बार बार घाव पैदा करने वाली समस्या की वजह से त्वचा , जीभ , होठ , गुर्दे , पित्ताशय का कैंसर होता है।
शरीर का वजन अचानक से कम या ज्यादा होना थकान और कमजोरी महसूस होना त्वचा के किसी हिस्से में बार-बार नीला पढ़ना त्वचा के नीचे गांठ महसूस होना लगातार एक महीने से खांसी या सांस लेने में कठिनाई होना त्वचा में बदलाव होना त्वचा मे जल्दी निशान पड़ जाना पाचन रोग जैसे दस्त या कब्ज होना निगलने में कठिनाई होना भूख कम लगना आवाज में बदलाव होना बार बार बुखार होना रात को पसीना आना मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना घाव के ठीक होने की प्रक्रिया धीमे होना बार बार संक्रमण होना
आयुर्वेदिक उपचार आयुर्वेद में कैंसर के इलाज के लिए कैंसर गजकेसरी रस हीरक भस्म कांचनार गुग्गुल वृद्धिवाधिका वटी जैसी चमत्कारी औषधियां उपलब्ध है कैंसर के इलाज में रोगी की इम्युनिटी बढ़ाने पर जोर दिया जाता है ।
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